Sunday, August 9, 2026

राष्ट्रधर्म अमर रहना चाहिए


 राष्ट्रधर्म अमर रहना चाहिए 

- मनोज जोशी 


मैं रहूँ या काल की धारा मुझे बहा ले जाए,

भारत माता का गौरव अक्षुण्ण रहना चाहिए।

तन मिटे तो मिट जाए इस पावन माटी में,

राष्ट्रधर्म का दीप निरंतर जलना चाहिए।

वेदों की ऋचाएँ गूँजें, गीता का संदेश रहे,

राम का मर्यादा-पथ, कृष्ण का उपदेश रहे।

शंकर का अद्वैत और बुद्ध की करुणा लेकर,

भारत को फिर विश्वगुरु बनना चाहिए।

गंगा निर्मल बहे, हिमालय अडिग खड़ा रहे,

हर वन, नदी और जीव के प्रति श्रद्धा रहे।

इस धरती के कण-कण में ईश्वर का वास मानकर,

प्रकृति का संरक्षण भी पूजा बनना चाहिए।

भगवा केवल रंग नहीं, त्याग और तप की ज्वाला है,

यह ऋषियों के ज्ञान और वीरों की वरमाला है।

धर्म विजय का घोष नहीं, सबके मंगल की कामना है,

विश्व के कल्याण का संकल्प जगना चाहिए।

जाति-पंथ की दीवारें भारत को बाँट न पाएँ,

हम अपने पुरखों और माटी को न भूल जाएँ।

भाषाएँ और वेश अनेक, पर राष्ट्रभाव हो एक,

हर हृदय में भारत का स्पंदन होना चाहिए।

घर-घर संस्कार जगें, मातृशक्ति का मान रहे,

शास्त्र का विवेक और शस्त्र का स्वाभिमान रहे।

अन्याय के सम्मुख मौन रहना धर्म नहीं होता,

सत्य की रक्षा में निर्भय होकर खड़ा होना चाहिए।

मेरा नाम भले इतिहास के पन्नों में न आए,

मेरी आहुति राष्ट्रयज्ञ की अग्नि बढ़ाती जाए।

मैं रहूँ या न रहूँ, इसकी चिंता मुझको नहीं,

हिंदु संस्कृति और भारत अमर रहना चाहिए

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